पढाई लिखाई करने के बाद नोकरी छोड़ ग़ाव पहुंचे मुनेंद्र सिंह का ग़ाव में है जलवा

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चन्द्र प्रकाश 
मोर्निंग सिटी संवाददाता 
बाह/ आगरा ! आज आपका परिचय एक ऐसे युवा उद्यमी से कराते हैं जिन्होंने शहर की चकांचौंध से भरी आकर्षक वेतन से भरपूर जीवन को त्याग कर गांव की ओर रुख किया और वहां रोजगार का सृजन किया,खूंखार भयावह चंबल के नाम से आप सभी परिचित होंगे अभी कुछ समय पहले तक लोग चंबल में जाने से भी कतराते थे क्योंकि वो डाकुओं का क्षेत्र माना जाता है,हम स्वयं आगरा वासी होकर भी बीहड़ से डरते थे जबकि वो आगरा से लगा हुआ क्षेत्र है,तो बात करते हैं मुनेंद्र सिंह की,ये सज्जन बाह के जरार गांव के एक ठाकुर परिवार से आते हैं इनकी शिक्षा दीक्षा आगरा में ही हुई, इन्होंने ग्रेजुएशन करने के बाद एक प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए भी किया,साथ मे इन्होंने इटेलियन भाषा भी सीखी और उसमे पारंगत हासिल की,पढ़ाई पूरी करने के बाद मुनेंद्र ने नौकरी शुरू कर दी, पर इनका नौकरी में मन नही लगता था, ये तो वापस गांव जाकर रहना चाहते थे, खैर जैसे तैसे नौकरी में पांच वर्ष काट दिये,इस अल्प समय मे जो भी अनुभव हुआ उसे लेकर ये आगरा लौट आये और टूरिज्म के क्षेत्र में कार्य करने लगे,घर से सम्पन्न थे इसलिये कम आमदनी में भी गुजारा अच्छा हो जाता था,इस दौरान ये विवाह के बंधन में भी बंध गये और जिम्मेदारियां बढ़ गईं,लेकिन अपने गांव लौटने की इच्छा और बलवती होती गयी, कुछ वर्ष पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बाद इन्होंने एक दिन निर्णय ले ही लिया गांव वापस जाने का,घर लौटे , घर के बुजुर्गों से बात की, चूंकि परिवार साधन संपन्न था इसलिये गांव में इनकी थोड़ी बहुत जमीन थी, जिसपर उन्होंने एक रिसोर्ट बनाने का फैसला लिया,सोचिये चंबल के बीहड़ों में रिसोर्ट खैर, ये अपने निर्णय पर अडिग रहे और रिसोर्ट का निर्माण होने लगा,इसी दौरान इन्होंने चंबल सफारी का आयोजन करना शुरू किया ! शुरू में एक मोटरबोट खरीदी और थोड़ा बहुत प्रचार प्रसार किया धीरे धीरे उन्हें चंबल में सफलता मिलने लगी,अबतक रिसोर्ट का निर्माण भी लगभग पूरा हो गया था, सो पर्यटक आने लगे और ठहरने भी लगे,फिर इन्होंने और भी मोटरबोट खरीदीं,रिसोर्ट में सुविधाएं बढ़ाईं ! काम चल निकला,जैसे जैसे सफलता मिलती गई मुनेंद्र जी को लोग जानने लगे, अब क्या अधिकारी क्या नेता क्या पर्यटक क्या वाइल्डलाइफ प्रेमी सब इनके यहां पहुंचने लगे,फिर इन्होंने हैंगग्लाइडिंग सैर शुरू की,जिसमे चंबल से लेकर बटेश्वर मंदिर श्रृंखला यमुना आदि का दर्शन शामिल था,इसके बाद जंगल सफारी वाक और न जाने क्या क्या एक्टिविटी बढ़ायी,आज स्वयं खूब सफल हैं और कम से कम 60-70 लोगों को अच्छा रोजगार भी दे रहे हैं जरार क्षेत्र में,और याद रहे ये वो बीहड़ क्षेत्र है जहाँ आज भी लोग डरते हैं जाने से मन मे उद्यमिता हो तो कहीं भी रोजगार सृजन हो सकता लेकिन अगर इरादे मजबूत हों और पूरा करने का हौसला हो तो कुछ भी संभव है।

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