चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्‍ट बेल्‍ट एंड रोड खटाई में, बलूच विद्रोहियों के पाकिस्‍तानी सेना पर हमले तेज

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पाकिस्‍तान में इमरान खान सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्‍ट बेल्‍ट एंड रोड अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में बलूचिस्‍तान प्रांत में विद्रोहियों ने पाकिस्‍तानी सेना पर अपने हमले तेज कर दिए हैं और चीनी निवेश को भी निशाना बना रहे हैं। चीन बेल्‍ट एंड रोड के तहत चाइना- पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर बना रहा है और इसमें करीब 60 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। बलूचों के हमले से चीन की टेंशन बढ़ गई है।

चीन ने साल 2015 में सीपीईसी परियोजना को शुरू करने के लिए ऐलान किया था। चीन अपने शिंजियांग प्रांत से पाकिस्‍तान के ग्‍वादर तक रेल और रोड बना रहा है। चीन ने बलूच‍िस्‍तान में कई प्रोजेक्‍ट बनाए हैं और बलूच विद्रोहियों का कहना है कि पाकिस्‍तान सरकार स्‍थानीय संसाधनों का दोहन चीन के प्रभाव बढ़ाने के सपने को पूरा करने के लिए कर रही है। चीन सीपीईसी के जरिए दक्षिण एशिया में भारत और अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देना चाहता है।

बलूच राष्‍ट्रवादियों के निशाने पर पाकिस्‍तान सरकार

बलूचों ने पिछले दिनों पाकिस्‍तानी सेना पर सबसे भीषण हमला किया था। करीब 4 दिनों तक चले इस हमले में पाकिस्‍तानी सेना के 9 जवानों की मौत हो गई थी। हालांकि बलूचों का दावा है कि मरने वालों की तादाद बहुत ज्‍यादा है।

यह हमला ऐसे समय पर हुआ जब इमरान खान चीन की यात्रा पर थे। पाकिस्‍तान ने इसके पीछे भारत का हाथ बताया था। अमेरिका में पाकिस्‍तान के राजदूत रह चुके हुसैन हक्‍कानी कहते हैं, ‘बलूच राष्‍ट्रवादियों के निशाने पर पाकिस्‍तान सरकार है जिसे वे दमनकारी मानते हैं।’

हक्‍कानी कहते हैं, ‘बलूच चीन को इ‍सलिए निशाना बनाते हैं क्‍योंकि चीन पाकिस्‍तानी सुरक्षा प्रतिष्‍ठानों का समर्थन करता है।’ राजनयिक विश्‍लेषक रफीउल्‍ला काकर कहते हैं, ‘बलूच पाकिस्‍तानी राज्‍य से आजादी चाहते हैं। उनका दावा है कि पाकिस्‍तान सरकार और चीन उनकी गरीबी और दमन के लिए जिम्‍मेदार है।’

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्‍तान में खराब होते सुरक्षा हालात चीन के प्रोजेक्‍ट को जटिल बना सकते हैं। हक्‍कानी ने कहा, ‘कोई भी निवेशक चाहे वह चीन ही क्‍यों न हो, लंबे समय तक हिंसा नहीं चाहेगा।’

हिंसा के बीच बड़े पैमाने पर निवेश असंभव

हक्‍कानी ने कहा कि बलूच भले ही कमजोर हो और कम संख्‍या में हों लेकिन वे अपनी जंग को लगातार बिना किसी खास विदेशी मदद के जारी रखे हुए हैं। काकर कहते हैं, ‘इन हमलों से चीन बलूच‍िस्‍तान से चला नहीं जाएगा।’ उन्‍होंने यह भी कहा कि दक्षिणी बलूचिस्‍तान में उग्रवाद की मौजूदगी में बड़े पैमाने पर निवेश असंभव है। बलूच विद्रोही चीन के विकास की महत्‍वाकांक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

-एजेंसियां

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