दलित युवक को भंडारे में नहीं परोसने दिया खाना

उत्तर प्रदेश मैनपुरी

औंछा/मैनपुरी। थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर औंछा स्थित ओम ऋषि आश्रम पर दलित युवक ने भंडारे में खाना परोसा तो लोग भड़क गए। युवक को जातिसूचक गालियां दी गईं। उसने विरोध किया तो आरोपियों ने उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद उसे भंडारे से भगा दिया। पीड़ित युवक ने थाने में तहरीर दी है। लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी जिसके बाद पीड़ित ने एसपी से गुहार लगाई, जिसके बाद एसपी के आदेश पर थाने में मुकदमा दर्ज हो सका।

थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर औंछा के ओम ऋषि आश्रम पर भागवत कथा हुई थी। मंगलवार की शाम को भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें गांव निवासी दलित युवक अजय प्रताप भी पहुंचा था। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने उसे भंडारे में इसलिए खाना नहीं परोसने दिया, क्योंकि वह अनुसूचित जाति से है। विरोध करने पर उसे पीटा भी गया। पीड़ित युवक की तरफ से एसपी को दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार भंडारे में अन्य युवकों के साथ वह भी खाना परोसने लगा था, जिस देख वहां मौजूद कुछ लोग भड़क गए। उक्त लोगों ने उसे जातिसूचक शब्द बोलते हुए खाना परोसने से रोक दिया। इस पर अजय प्रताप ने कहा कि मैं भी इंसान हूं। भारत के संविधान में मुझे भी स्वतंत्रता दी गई है। आरोप है कि अजय की बात सुनकर आरोपी भड़क गए। आरोपियों ने उसे भंडारे में न खाना परोसने दिया और न ही खाने दिया। विरोध करने पर आरोपियों ने उसकी पिटाई कर दी और जातिसूचक गालियां देकर भंडारे से भगा दिया। जान से मारने की धमकी भी दी गई। एसपी के आदेश पर पीड़ित युवक ने औंछा निवासी हरीबाबू पुत्र गंगाधर, रविन्द्र पुत्र उजागर सिंह, रविन्द्र पुत्र शांतिप्रसाद, सोनू पुत्र मुन्नालाल, अवधेश उर्फ भूरे पुत्र रामदुलारे के खिलाफ बलवा करके गाली गलौज, जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट करने की धराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।

सफेदपोश के दबाव में थाने से भगा दिया
मंगलवार की देर शांय घटना के बाद जब पीड़ित तहरीर लेकर थाने गया तो वहां पर उसकी मुलाकात थानेदार से हुई, पीड़ित ने तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई, जिसपर थानेदार ने रिपोर्ट दर्ज करने से साफ शब्दो में मना कर दिया। तथा पीड़ित को थाने से बाहर निकल जाने का हुक्म सुना दिया। पीड़ित ने बताया कि थानेदार के पास सत्ताधारी दल के सफेदपोश का फोन आ गया था, सफेदपोश के दबाव के चलते थानेदार ने रिपोर्ट नही लिखी और सफेदपोश थाने पर आने वाला था, इसलिए थानेदार ने थाने से भगा दिया।

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