कर्म ही सबसे बड़ा धर्म, यही बड़ी पूजा – डॉ. मणिभद्र महाराज

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रिपोर्ट — फरहान खान 

आगरा। राष्ट्र संत नेपाल केसरी डॉ. मणिभद्र महाराज ने कहा कि दुख का मूल कारण अभाव है। इस दुख को दूर करने के लिए बड़े-बड़े लोग संतों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन सत्कर्म करना ही सबसे बड़ा धर्म और बड़ी पूजा है। वर्षावास के तहत न्यू राजामंडी के महावीर भवन में मंगलवार को प्रवचन करते हुए जैन मुनि ने कहा कि साधु-संतों के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जो किसी के दुख दूर कर दें। उनके पास पहुंचने मात्र से बहुत से दुख स्वत: ही दूर हो जाते हैं। जैन मुनि ने कहा कि जीवन में दुख आने का प्रमुख कारण है मान, मद लोभ, क्रोध, अशक्ति, ईर्ष्या आदि। यदि इनका त्याग कर देंगे तो दुख होगा ही नहीं। यानि संयम, साधना, आराधना ही सुख का प्रमुख आधार है। जैन संत ने कहा कि धर्म किसी जाति या समुदाय में विभाजित नहीं है। इसे तो कोई भी कर सकता है। भगवान महावीर कहते हैं कि मनुष्य जाति ही सर्वश्रेष्ठ जाति है, इससे बड़ी कोई जाति नहीं है। किसी भी जाति, समुदाय का व्यक्ति हो, आत्मा सभी में समान रहती है। इसलिए हम किसी को बांट नहीं सकते। जैन संत ने कहा कि भगवान महावीर कहते थे कि किसी के जैसे बनने की कोशिश मत करो। तुम्हारी आत्मा में ताकत है कि वह परमात्मा बन सकती है। इसके लिए प्रयास जरूरी है। कई बार यह भी सुनने में आता है कि धनी मानी व्यक्ति ने दीक्षा ली तो उसने बड़ा काम किया। छोटे व्यक्ति ने दीक्षा ली तो लोग कहते हैं कि इसके पास खाने के लिए भी नहीं होगा, इसलिए साधु बन रहा है। जबकि दीक्षा लेने वाला कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। साधु बनने वालों पर टीका टिप्पणी करना गलत। स्वयं तो कुछ बन नहीं पाते, लोगों पर टिप्पणी करते हैं। दीक्षा में विसर्जन करना होता है। हर चीज छोड़नी होती है। इसलिए तो साधु को देवता भी नमन करते हैं। जैन मुनि हरिकेश बल का प्रसंग सुनाते हुए जैन संत ने कहा कि जिन्हें सम्मान चाहिए, उन्हें अपमान की चिंता होती है। फकीर का क्या सम्मान, क्या अपमान, वह तो ईश्वर की आराधना में मस्त रहता है। ऐसे संत का सानिध्य ही बहुत बड़ा आशीर्वाद होता है। मंगलवार की धर्म सभा में दिल्ली से राजेश जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित \थे।तपस्या की कड़ी में मनोज जैन की नौ उपवास की तपस्या चल रही है। डॉक्टर मणिभद्र जी की प्रेरणा से महावीर भवन में जैन साहित्य पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया। जिसमे राजेश सकलेचा, अनिल जैन, विमल धारीवाल, विवेक कुमार जैन, आदेश बुरड़ सहित अनेक धर्मप्रेमी उपस्थित थे।

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