हर साल बढ़ रहा लंग ट्रांसप्लांट, विदेशों से भारत आकर इलाज ले रहे मरीज: डॉ. एम एस कंवर

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लंग ट्रांसप्लांट को लेकर उत्तर प्रदेश के आगरा में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने आयोजित किया इंटरएक्टिव कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों ने कई अहम जानकारी की साझा, कहा-यह सर्जरी नहीं, मरीजों के लिए है संजीवनी 
मोर्निंग सिटी संवाददाता
आगरा।  हम अक्सर लंग ट्रांसप्लांट के बारे में सुनते हैं। लेकिन, हमें यह नहीं पता होता कि यह सिर्फ एक सर्जरी नहीं है बल्कि प्री लंग ट्रांसप्लांट के साथ शुरू होने वाली प्रक्रिया है जो आईपीएफ, सीओपीडी, एम्फिसीमा, कोविड फाइब्रोसिस, पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी अन्य गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार है।
यह कहना है इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. एम एस कंवर का। लंग ट्रांसप्लांट के विशेषज्ञ डॉ. कंवर ने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स की ओर से आयोजित एक इंटर एक्टिव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त रोगियों के लिए लंग ट्रांसप्लांट संजीवनी है जिसकी प्रक्रिया में फेफड़े और सामान्य पुनर्वास के साथ साथ ऑक्सीजन थैरेपी व एकमो (ECMO) भी शामिल होता है।
दरअसल लोगों को उन्नत उपचार प्रदान करने के उद्देश्य से अपोलो की पहल के तहत नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने आगरा के होटल हॉलिडे इन में इंटरएक्टिव कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान नई दिल्ली से डॉ एम एस कंवर के अलावा डॉ राजेश चावला, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स और डॉ मुकेश गोयल, वरिष्ठ सलाहकार कार्डियोथोरेसिक व संवहनी सर्जरी उपस्थित रहे। इंटरएक्टिव कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भारत में उपलब्ध उन्नत उपचार के तौर-तरीकों के साथ-साथ फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की गंभीरताओं के बारे में जानकारी साझा की।
इस दौरान वरिष्ठ डॉ. एम एस कंवर ने बताया कि दुनिया के उन्नत देशों में लोकप्रिय लंग ट्रांसप्लांट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सालाना इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही यह जटिल प्रक्रिया अब भारत में भी उपलब्ध है। इसलिए कई देशों से मरीज चिकित्सा लाभ के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। नई दिल्ली स्थित हमारे अस्पतालों में इन मरीजों को भेजा जा रहा है जिनमें अधिकांश डबल लंग ट्रांसप्लांट से जुड़े मामले हैं।
कार्यक्रम के दौरान इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स नई दिल्ली के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजेश चावला ने बताया कि इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल लंबे समय से किडनी, लीवर और बोन मैरो का प्रमुख प्रत्यारोपण केंद्र बना हुआ है। यहां हृदय प्रत्यारोपण भी किए जा रहे हैं। डॉ राजेश चावला के अनुसार, “ फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए सबसे जरूरी बेहतर बुनियादी ढांचे और गहन देखभाल होता है। यह दोनों ही सुविधा अपोलो में उपलब्ध हैं।’’ वे कहते हैं, उन्नत सर्जिकल प्रक्रिया यानी लंग ट्रांसप्लांट ने विश्व स्तर पर काफी सफलता हासिल की है। इससे भारत भी अलग नहीं है। यहां न सिर्फ इसकी उपलब्धता बल्कि विशेषज्ञों की निगरानी की बदौलत गंभीर मामलों में भी काफी सफलता हासिल की है।
चर्चा के दौरान इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स नई दिल्ली के कार्डियोथोरेसिक एंड हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकेश गोयल ने कहा, “किसी भी पुरानी बीमारी के साथ रहना मरीज और उसके परिवार के लिए हमेशा दर्दनाक होता है। फेफड़े का ट्रांसप्लांट वह उपचार तरीका है जो लास्ट स्टेज के मरीज को संजीवनी दे सकता है। ट्रांसप्लांट के बाद अधिकांश मरीज जीवन की बेहतर गुणवत्ता का आनंद लेते हैं।
डॉ. गोयल ने चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के आपसी संबंध के बारे में बताया कि आधुनिक दौर में सामने आ रहे प्रौद्योगिकी के नए नए तौर तरीकों से ट्रांसप्लांट प्रक्रिया और उसके बाद मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया है। जरा सोचिए, फेफड़ों से जुड़ी बीमारी और ट्रांसप्लांट के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी मिलती है तो इन बीमारियों से जुड़ी मृत्युदर को कम किया जा सकता है और मरीजों को बेहतर जीवन दिलाया जा सकता है।
इसलिए मरीजों को स्वास्थ्य जांच को लेकर कतई निराश नहीं होना चाहिए। समय पर जांच के जरिए बीमारियों से बचा जा सकता है क्योंकि आज देश में फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से बचने के लिए बेहतर उपचार के तौर-तरीके उपलब्ध हैं। सिर्फ बीमारी को लेकर मन में डर लाना और उसकी वजह से इलाज के प्रति झिझक पैदान होना पूरी तरह से गलत है। चिकित्सीय क्षेत्र में हमेशा समय पर उपचार मरीज की रिकवरी और बाद वाले बेहतर जीवन का परिणाम होते हैं।
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इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के बारे मेंः
भारत का पहला जेसीआई मान्यता प्राप्त अस्पताल इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली सरकार और अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है। जुलाई 1996 में कमीशन किया गया यह अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप द्वारा स्थापित तीसरा सुपर स्पेशियलिटी टर्शियरी केयर हॉस्पिटल है। 15 एकड़ में फैले इस अस्पताल में 300 से भी अधिक विशेषज्ञ, 700 से अधिक ऑपरेशनल बेड, 19 ऑपरेशन थिएटर, 138 आईसीयू बेड, चौबीस घंटे फार्मेसी, एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला, 24 घंटे आपातकालीन सेवा और एक सक्रिय एयर एम्बुलेंस के साथ 57 विशेषताएं मौजूद हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स दिल्ली का देश में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट में अग्रणी कार्यक्रम है। भारत में पहला सफल बाल रोग और वयस्क लीवर प्रत्यारोपण इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में ही हुआ था। चिकित्सा प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता के मामले में भी यह अस्पताल सबसे आगे है। यह अपने रोगियों की देखभाल के लिए नवीनतम नैदानिक, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सुविधाओं की एक पूरी श्रृंखला प्रदान करता है। अस्पताल ने 64 स्लाइस सीटी और 3 टेस्ला एमआरआई, नोवालिस टीएक्स और एकीकृत पीईटी सूट की शुरुआत के साथ भारत में सबसे परिष्कृत इमेजिंग तकनीक पेश की है। इंद्रप्रस्थ अपोलो ने निवारक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों की अवधारणा का भी बीड़ा उठाया है और दशकों से एक संतुष्ट ग्राहक आधार बनाया है। पिछले कुछ वर्षों से द वीक सर्वे द्वारा अस्पताल को लगातार भारत के सर्वश्रेष्ठ 10 अस्पतालों में स्थान दिया गया है।

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