वीर गोकुल सिंह जाट जी की प्रतिमा का हुआ अनावरण

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रिपोर्ट – करीम खान

आगरा।  शनिवार को शाहजहां गार्डन के मुख्य द्वार के सामने तिराहा पर स्थापित वीर गोकुल सिंह जाट प्रतिमा का अनावरण एवं सम्बोधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर नवीन जैन ने की। अनावरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रो, एसपी सिंह बघेल मौजूद रहे। इसके अलावा राज्यसभा सांसद हरद्वार दुबे, विधायक डाॅ जी एस धर्मेश, एमएलसी विजय शिवहरे, विधायक पुरूषोत्तम खंडेलवाल, विधायक धर्मपाल सिंह, जे एस फौजदार, भाजपा महानगर उपाध्यक्ष संजय चौहान आदि मंचासीन अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

अनावरण से पूर्व कार्यक्रम स्थल पर मंत्रोच्चारण एवं विधि विधान से हवन यज्ञ संपन्न हुआ। जिसमें सभी अतिथियों और समाज के लोगों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया और यज्ञ हवन में आहुति डाली। इसके बाद मुख्य अतिथि एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रो एस पी सिंह बघेल, महापौर नवीन जैन और अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से वीर गोकुल सिंह जाट की प्रतिमा का अनावरण किया। गोकुला जाट की प्रतिमा का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक किया गया। इस दौरान जाट समाज के समर्थकों ने जोर-शोर से नारे लगाते हुए अपने समाज के वीर महापुरूष की प्रतिमा शहर में स्थापित किये जाने की खुशी जाहिर की।

संबोधन कार्यक्रम के दौरान महापौर नवीन जैन ने वीर गोकुल सिंह जाट के जीवनी इतिहास का वर्णन करते हुए बताया कि तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब द्वारा गोकुल सिंह जाट पर तमाम अत्याचार किये गये और उनके एक-एक अंग को काटकर उनसे जबरन धर्म परिवर्तन को कहा गया लेकिन एक साधारण किसान परिवार से आने वाले वीर गोकुल सिंह जाट ने अपने समाज व देशभक्ति को सर्वोपरि रखते हुए औरंगजेब के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया और उन्होंने हंसते हंसते अपनी जान दे दी। ऐसे वीर महापुरूष को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए शहर में गोकुला जाट की प्रतिमा स्थापित करने का कार्य किया है। ताकि शहर के लोग और वर्तमान पीढ़ी ऐसे वीर क्रांतिकारी योद्धाओं के बारे में जान सके जो इतिहास के पन्नों में गुम हैं।

महापौर नवीन जैन ने बताया कि वीर गोकुल सिंह जाट की यह प्रतिमा लगभग 17 फीट उंची है (आधार की उंचाई लगभग 5 फीट मिलाकर)। इसे तैयार करने में लगभग 35 लाख की लागत आई है। इस प्रतिमा को ग्वालियर के शिल्पकार प्रभात राॅय ने तैयार किया है।

वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने महापौर नवीन जैन का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आगरा शहर में विकास के क्षेत्र में शानदार काम तो किया ही साथ ही प्रत्येक जाति-समाज को ध्यान में रखते हुए शहर में कई ऐसे महापुरूषों की प्रतिमा स्थापित कराने का काम किया है जिनसे हम सभी को प्रेरणा मिलती है। उन्हीं में से एक हैं वीर गोकुल सिंह जाट। उन्होंने किसानों और समाज को अत्याचार से बचाने के लिए सीमित संसाधनों के साथ औरंगजेब से लड़ाई लड़ी और देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गये। आज ऐसे वीर महापुरूष की प्रतिमा का अनावरण कर हमने वीर गोकुल सिंह जाट के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की है।

 

राज्यसभा सांसद हरद्वार दुबे ने कहा कि प्रत्येक समाज में ऐसे वीर महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अकेले दम पर विदेशी ताकतों और क्रूर शाहकों से लड़कर अपने प्राणों की आहुति दी है। आज ऐसे ही वीर गोकुल जाट की प्रतिमा का अनावरण हम कर रहे हैं तो वहीं आने वाले कल में भी क्षत्रिय समाज के वीर प्रतापी महाराणा प्रताप की प्रतिमा का भी अनावरण किया जाएगा। इस पुनीत कार्य के लिए महापौर नवीन जैन को धन्यवाद।

विधायक डॉ जी एस धर्मेश और विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने संयुक्त रूप से गोकुल सिंह जाट के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तव में शहर में ऐसे महापुरुषों की प्रतिमा की स्थापना होना जरूरी है जिन्होंने समाज व देश के हित में विशेष योगदान दिया।

एमएलसी विजय शिवहरे ने भी महापौर को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज हम सच्चे वीर गोकुल सिंह जाट की प्रतिमा का अनावरण तो कर ही रहे हैं वहीं महापौर नवीन जैन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महापुरुषों की प्रतिमा को भी स्थापित कराने का कार्य किया है।

गोकुल जाट की जीवनी पर आधारित किताब का हुआ विमोचन

इस मौके पर मंचासीन अतिथियों द्वारा वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार भानु प्रताप सिंह द्वारा गोकुल सिंह जाट के जीवनी इतिहास पर लिखी गयी किताब का विमोचन भी किया गया। इस किताब को लिखने के लिए भानु प्रताप ने स्वयं गोकुल सिंह जाट के गांव एवं आस-पास क्षेत्र का भ्रमण किया। किताब के माध्यम से ऐसे वीर महापुरूष की जीवनी को समाज के सामने प्रस्तुत करने के लिए महापौर नवीन जैन और केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रो बघेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

*कौन थे गोकुल सिंह जाट*

किसान कुल में जन्में गोकुल सिंह जाट ही वो महान योद्धा थे जिन्होंने बड़े साम्राज्य के मुगल शासक को चुनौती दी। जब मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों से हिन्दू जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी। मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, हिन्दू स्त्रियों की इज्जत लूटकर उन्हें मुस्लिम बनाया जा रहा था। किसानों से जबरदस्ती अनेक तरह के लगान व कर वसूले जा रहे थे। तब गोकुल सिंह ने आगरा से लेकर मथुरा तक किसान परिवारों और जाट समाज से उनके साथ खड़े होकर इन आत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लडने की अपील की। तब अपने बीच ऐसे वीर नेता को देखकर न सिर्फ जाट समाज बल्कि राजपूत, गुर्जर, यादव, मेव, मीणा इत्यादि समस्त हिन्दू जातियों के परिवारों ने गोकुल सिंह को पूर्ण समर्थन दिया। बृज भूमि सभी जाति-पांति भूलकर उनके साथ हो गयी। उन्होंने किसानों के हितों की सुरक्षा करने के लिए महान संघर्ष किया।

किसानों को दबाने के लिए औरंगजेब ने अब्दुन्नवी नामक एक कट्टर मुसलमान को मथुरा का फौजदार नियुक्त किया। अब्दुन्नवी के सैनिकों का एक दस्ता मथुरा जनपद में चारों ओर लगान वसूली करने निकला। मथुरा के पास सिनसिनी गाँव के सरदार गोकुल सिंह के आह्वान पर किसानों ने लगान देने से इनकार कर दिया। तब अब्दुन्नवी ने सिहोरा गाँव पर हमला किया। उस समय वीर गोकुल सिंह गाँव में ही थे। भयंकर युद्ध हुआ लेकिन अब्दुन्नवी और उसकी सेना सिहोरा के वीर हिन्दुओं के सामने टिक ना पाई और सारे सैनिक गाजर-मूली की तरह काट दिए गए। वीर गोकुल सिंह जाट से लड़ने के तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब को खुद ही आना पड़ा। गोकुलसिंह ने मुगल की शाही सेनाओं का सामना किया। लगभग 6 दिन तक युद्ध चलने के बाद अंततः गोकुलसिंह और उनके ताऊ उदयसिंह को सपरिवार बंदी बना लिया गया।

गोकुल सिंह को आगरा कोतवाली लाया गया। यहां उनसे इस्लाम कबूल करने को कहा गया। तमाम तरह की यातनाएं दी गयीं। कू्रर शासक के आदेश पर गोकुल सिंह के एक-एक अंग को काटा गया लेकिन इसके बावजूद गोकुल सिंह जाट नहीं झुके। एक वीर की तरह उनके चेहरा और शरीर निष्कंप था। अंत में एक दिन वह आया जब जल्लाद ने कुल्हाड़ी से उनके एक-एक अंग पर वार किया। गोकुल सिंह के शरीर से फौव्वारे के रूप में रक्त निकला। जिसकी वीरता को सम्मानित करते हुए शहादत स्थल के निवासियों ने उस स्थल का नाम फौव्वारा रख दिया।

अनावरण कार्यक्रम में रामकुमार गुप्ता, नवीन गौतम, गौरव शर्मा, हरवीर सिंह, राजेश्वरी देवी, कर्मवीर सिंह, बृज किशोर अग्रवाल, रवि माथुर, राकेश जैन, प्रदीप अग्रवाल, हेमेन्द्र पाल सिंह, भवतोष चौधरी, सपना जैन, हरी कुमारी, रवि शर्मा, जितेन्द्र सिंह, जगदीश पचौरी, भोज कुमार शर्मा, नेहा गुप्ता, मुकेश सोलंकी, ठाकुर पवन भदौरिया, प्रवीन जैन आदि मौजूद रहे जबकि कार्यक्रम का संचालन अनिल चौधरी ने किया।

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