मैनपुरी में सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश

उत्तर प्रदेश मैनपुरी

मैनपुरी। थाना कुर्रा क्षेत्र में पशुपालक की सिर और हाथ काटकर की गई हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। हत्याकांड को भेड़ें लूटने इरादे से अंजाम दिया गया था। इस घटना में एक नहीं, बल्कि दो आरोपित शामिल थे। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
कस्बा कुर्रा निवासी पशुपालक कृपाल सिंह यादव भेड़ पालने का काम करता था। भेड़ पालन के लिए उन्होंने कस्बा निवासी मिथुन गुप्ता का घर और खाली जगह किराये पर ली थी। 24 मई की रात कृपाल सिंह लापता हो गया। उनकी भेड़ें भी गायब थी। आसपास के लोगों ने उनको तलाश किया। पता न चलने पर मुंबई में रह रहे उनके भाई लखपति सिंह को सूचना दी गई। 29 मई को कुर्रा पहुंचे लखपति सिंह ने भी अपने भाई को तलाश किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने थाने में सूचना दी। जिसपर पुलिस ने कृपाल सिंह को तलाश किया तो भेड़ पालन वाले स्थान पर लेंड़ी घूरे के ढेर में उनका का शव दबा मिला। सिर और हाथ काटकर उनकी हत्या की गई थी। लखपति सिंह ने गांव हाजीपुर निवासी विक्रम सिंह के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एसपी कमलेश दीक्षित ने प्रेसवार्ता में बताया कि जिस तरह से घटना को अंजाम दिया गया था, उससे आशंका पैदा हो रही थी कि घटना में एक से अधिक अपराधी शामिल हो सकते हैं। इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया तो हत्या में राजू चौहान निवासी भोगपुर थाना कुर्रा के शामिल होने की जानकारी मिली। पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। शुक्रवार रात मिली सूचना के बाद इंस्पेक्टर कुर्रा कैलाश बाबू ने अपनी टीम के साथ बिलंदा पुल के पास मौजूद विक्रम सिंह और राजू चौहान की घेराबंदी की तो दोनों पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने लगे। पुलिस ने दोनों को घेराबंदी कर पकड़ लिया। दोनों को जेल भेजा गया है।

हत्यारोपितों को नहीं था कार्रवाई का डर
पशुपालक के परिजन बाहर रहते हैं इसलिए हत्यारोपितों को किसी भी कार्रवाई का डर नहीं था। इसीलिए दोनों आरोपियों ने पशुपालक की हत्या की योजना तैयार की थी। पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। दोनों ने बताया कि कृपाल सिंह की हत्या से पहले घटना को अंजाम देने की रणनीति तैयार की गई थी। पशुपालक के परिजन बाहर रहते हैं, इसलिए कोई कार्रवाई भी नहीं होगी। दोनों ने स्वीकार किया कि हत्या करने के बाद वे कृपाल सिंह की 59 भेड़ों को दो लोडरों में लादकर ले गए थे।

बातचीत के दौरान ही कर दी हत्या
आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दोनों बातचीत के बहाने 24 मई कीे रात कृपाल सिंह के घर पहुंचे और दरवाजा खुलवाया। बातचीत के दौरान ही उनकी हत्या कर दी। चाकू से गला और हाथ काटकर शव को लेड़ी घूरे के ढेर में दबा दिया।

जसवंतनगर में बेची थी भेड़ें
दोनों ने स्वीकार किया कि लूटी गई 59 भेड़ों को उन्होंने इटावा के जसवंतनगर के पशु बाजार में तीन लाख रुपये में बेच दिया था। जिसमें से 14400 रुपये दोनों ने मिलकर खर्च कर लिए है। बाकी 285600 रुपये की धनराशि पुलिस ने बरामद कर ली है।

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