आगरा को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने एवं बाल सुरक्षा को लेकर यूपी बाल आयोग को इन 10 बिंदुओं पर दिए सुझाव

आगरा उत्तर प्रदेश सामाजिक स्थानीय समाचार
मोर्निंग सिटी संवाददाता 
1. उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन में मूल निवास पत्र, आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक तथा जाति प्रमाण पत्र लिए जाते हैं। सत्यापन के बाद विवाह कर दिए जाते हैं। इनमें उम्र संबंधी कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जाता है जिससे उम्र का सही सत्यापन नहीं हो पाता है। बिचौलिए इसका फायदा उठाते हैं और नाबालिगों का विवाह करा देते हैं उम्र के लिए जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा मेडिकल परीक्षण के अनुसार ही उम्र निर्धारित की जा सकती है जबकि में इनमें से किसी भी दस्तावेज को नहीं लिया जा रहा है। केवल आधार कार्ड के आधार पर ही उम्र का सत्यापन होता है। जबकि आधार कार्ड को केवल पते के सत्यापन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है आधार कार्ड में उम्र का हेर फेर किया जा सकता है। अधिकांश लाभार्थियों की जन्मतिथि आधार कार्ड में एक जनवरी ही दर्ज होती है। इसमें बाल विवाह की भी आशंका है। साथ ही विवाह समारोह के पश्चात किसी भी जोड़े को विवाह प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। विवाह योजना के आवेदनों में उम्र संबंधी दस्तावेजों जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा मेडिकल परीक्षण को मान्यता दी जाए जिससे नाबालिगों का विवाह न हो सके।
2. आगरा की सड़कों पर बच्चे बड़ी संख्या में भीख मांगते हैं। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली सड़क एमजी रोड पर बहुत बच्चे भीख मांगते हैं। इस संबंध में महफूज द्वारा कई बार सर्वे करके बाल कल्याण समिति तथा प्रशासन को दिया जा चुका है। उन्हीं स्थानों पर आज भी बच्चे भीख मांग रहे हैं। गैंग द्वारा भीख मंगवाने की आशंका है। इन बच्चों को मुक्त कराकर सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाए।
3. लापता बच्चों के मामले में जनपद में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में मासिक जनसुनवाई आयोजित कराई जाए। जिसमें बच्चों के परिजन तथा विवेचकों को बुलाकर केस का अपडेट लिया जाए।
4. लापता बच्चे वापस लौटने पर उनके बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर उनका फॉलोअप कराया जाए।
5. सभी सरकारी तथा गैर सरकारी बाल संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों का डाटा ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड पर्सन खोया पाया वेबसाइट पर दर्ज कराया जाए जिससे लापता बच्चों को ट्रेस किया जा सके।
6. मिसिंग चिल्ड्रन एसओपी के अनुसार चार माह तक लापता बच्चा न मिलने पर केस एएचटीयू में स्थानांतरण करने का प्रावधान है लेकिन ऐसे केस स्थानांतरित नहीं किए जा रहे हैं। इन केसों की विवेचना हेतु एएचटीयू में केस स्थानांतरित किए जाएं।
7. थाने में नियुक्त बाल कल्याण अधिकारी बदलते रहते हैं। उनके नंबर स्थायी नहीं हैं। सभी बाल कल्याण अधिकारियों को सीयूजी नंबर मुहैया कराए जाएं जिससे उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके। 8. आवासीय मदरसों का जेजे एक्ट में पंजीकरण कराया जाए।
9. राजनगर लोहामंडी रेलवे लाइन के पास तथा देवरी रोड नगला जस्सा में दो परिवारों आठ बच्चे बेसहारा है। जिनके माता पिता की मौत हो चुकी है उनमें छह लड़कियां तथा दो लड़के हैं। उनके सामने भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा का संकट हैं। इन बच्चों के बारे में बाल कल्याण समिति तथा डीसीपीयू को जानकारी दी जा चुकी है। इन बच्चों की मदद की जाए।
10. आगरा को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने के लिए बाल अधिकार कार्यकर्ताओं / विशेषज्ञों के साथ जनपद का चाइल्ड प्रोटेक्शन केयर प्लान बनाया जाए। जिसकी मासिक समीक्षा की जाए।

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