क्रांतिकारियों की शरण स्थली रहा मकान अब हो चुका है जर्जर सोनू अग्रवाल

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आगरा। सरदार भगत सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत को नींद से जगाने के लिए दिल्ली में लेजिस्लेटिव असेंबली में जो बम फाेड़ा था वो आगरा में ही बनाया गया था जंग-ए-आजादी के दौर में आगरा में जहां गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन होते थे, वहीं क्रांतिकारियों ने भी इसे अपना केंद्र बनाया था। चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त यहां रहे थे। नूरी दरवाजा में उनकी शरण स्थली रहा मकान आज भी है। क्रांतिकारियों की गतिविधियों का साक्षी रहा यह मकान आज जर्जर हो चुका है। इसके संरक्षण को किसी ने सुध नहीं ली सरदार भगत सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत को नींद से जगाने के लिए दिल्ली में लेजिस्लेटिव असेंबली में जो बम फाेड़ा था, वो आगरा में ही बनाया गया था। इस बात का जिक्र सरदार भगत सिंह शहीद स्मारक समिति द्वारा मुद्रित कराई गई किताब ‘आगरा मंडल के देशभक्त शहीदों पर स्मारिका’ में मिलता है। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी ने आगरा को अपना केंद्र बनाया था। यहां आए चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव ने नागरिकों में नई चेतना जगाई थी। वर्ष 1926 से 1929 तक शहर क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। क्रांतिकारी यहां छद्म नामों से नूरी दरवाजा, हींग की मंडी, नाई की मंडी में किराये पर लिए मकानों व कमरों में रहे। चंद्रशेखर आजाद ने बलराज, भगत सिंह ने रणजीत, राजगुरु ने रघुनाथ और बटुकेश्वर दत्त ने मोहन बनकर यहां निवास किया था। नूरी दरवाजा उनका मुख्य केंद्र था। यहां आज भी वो मकान है, जो कभी क्रांतिकारियों की शरण स्थली रहा था। यह मकान अब जर्जर हो चुका है। इसके संरक्षण को कभी भी कदम नहीं उठाया था।

सोनू अग्रवाल कांग्रेस नेता

 

क्षेत्रीय निवासी सोनू अग्रवाल का कहना है की भगत सिंह जिस मकान में रहते थे, वो जर्जर हो चुका है। इस मकान का संरक्षण कराया जाना चाहिए। यह देश की आजादी से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है क्रांतिकारियों ने नूरी दरवाजा स्थित जिस मकान को अपनी पनाहगाह बनाया था, आज वह जर्जर हो चुका है। इसमें नीचे पेठा व अन्य सामान की दुकानें हैं। ऊपरी मंजिल क्षतिग्रस्त हो चुकी है। आजादी के नायकों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी यादों को इस तरह विस्मृत कर दिया जाएगा क्यों की इस जर्जर बिल्डंग को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी से यह खस्ता हाल बनी है। सरकार को चाहिए कि यहां शहीद भगत सिंह की याद में उनकी यादों को संजोया जाए।

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