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Agra News:अफ्रीका में फंसा आगरा का परिवार कंपनी ने लूट का आरोप लगाकर पासपोर्ट छीना,बेटी के दूध तक के पैसे नहीं, भारत लौटने की गुहार

by morning on | 2025-11-20 16:17:29

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Agra News:अफ्रीका में फंसा आगरा का परिवार  कंपनी ने लूट का आरोप लगाकर पासपोर्ट छीना,बेटी के दूध तक के पैसे नहीं, भारत लौटने की गुहार


Morning City

आगरादयालबाग निवासी धीरज जैन और उनका परिवार इन दिनों वेस्ट अफ्रीका के डुआला (कैमरून) में गंभीर संकट में फंसा हुआ है। जिस भारतीय कंपनी में धीरज मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे, उसी कंपनी ने उन पर लाखों रुपये की लूट का आरोप लगाते हुए पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं। नौकरी से निकाले जाने के बाद परिवार के पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। धीरज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार से तत्काल मदद की अपील की है। वीडियो में वे बताते हैं कि बेटी के दूध और दवाइयों तक के पैसे नहीं हैं और वहां की परिस्थितियों में 10 हजार फिफा के लिए भी किसी की हत्या कर दी जाती है। धीरज दयालबाग के बसेरा वसंत रेजिडेंसी, खासपुर में रहने वाले हैं। उनके पिता धनपाल जैन ड्राइवर हैं। धीरज की शादी 2022 में फिरोजाबाद निवासी सुप्रिया जैन से हुई थी। वे साल 2012 से पुणे की सदगुरु टूर एंड ट्रैवल्स सर्विसेज कंपनी में अकाउंट एंड फाइनेंस मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। कंपनी ने उनकी पोस्टिंग कैमरून के डुआला ऑफिस में की थी, जहां वे अपनी पत्नी और डेढ़ वर्षीय बेटी राघवी के साथ रह रहे थे। पिछले वर्ष वे कुछ समय के लिए भारत भी आए थे।

धीरज बताते हैं कि सात सितंबर 2024 को वे कंपनी के 25 लाख रुपये लेकर ड्राइवर के साथ ऑफिस जा रहे थे। रास्ते में हथियारबंद बदमाशों ने उनसे कैश लूट लिया। इस घटना की शिकायत उन्होंने और ड्राइवर ने स्थानीय पुलिस में की थी। बाद में वे नवंबर 2024 में दो महीने की छुट्टी पर भारत लौट आए। जनवरी 2025 में जब वे फिर से डुआला पहुंचे तो उन्हें पता चला कि ड्राइवर ने अपना बयान बदल दिया है और कंपनी ने लूट का आरोप उन्हीं पर लगा दिया है। धीरज का कहना है कि बीमा कंपनी से क्लेम न मिलने पर कंपनी अब उन्हें ही आरोपी बताकर फंसा रही है। दो साल का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने के बाद भी कंपनी ने उनका पासपोर्ट छीन लिया है और खर्च उठाने से भी इंकार कर दिया है। परिवार अब एक तरह से बंधक बनकर रह गया है।

धीरज ने वीडियो में बताया कि अफ्रीका में हालात बेहद खतरनाक हैं। वहां मामूली रकम पर भी किसी की हत्या कर दी जाती है। उनके घर पर रोज पुलिस आ रही है और कंपनी के प्रभावशाली लोग दबाव बना रहे हैं। अजमेर निवासी जिम्मी अलवानी और बिहार के मनीष ठाकुर का नाम लेते हुए धीरज ने कहा कि ये दोनों उन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रहे हैं। धीरज की पत्नी और उनकी छोटी बेटी भी मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। बच्ची का फॉर्मूला मिल्क खत्म हो चुका है और दवाइयाँ खरीदने तक की स्थिति नहीं है। धीरज का कहना है कि उन्होंने कैमरून स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी है। नियमों के अनुसार कोई भी कंपनी कर्मचारी का पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकती, लेकिन अफ्रीकी देशों में भारतीयों के साथ ऐसे मामले अक्सर सुनाई देते हैं। अब धीरज और उनका परिवार भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से अपील कर रहा है कि उनके पासपोर्ट वापस दिलाए जाएं या इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किया जाए। वे चाहते हैं कि भारत लौटने के लिए सुरक्षित और त्वरित व्यवस्था की जाए। धीरज का कहना है कि विदेशों में फंसे भारतीयों को भारत सरकार हमेशा बचाती रही है और उन्हें भी उसी उम्मीद पर भरोसा है।

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