सब्सक्राइब करें
शहर और राज्य सामाजिक

Mainpuri News:शादियों में भौतिकता की चकाचौंध में खो गया सनातन धर्म

by morning on | 2025-11-24 16:08:18

Share: Facebook | Twitter | Whatsapp | Linkedin Visits: 116


Mainpuri News:शादियों में भौतिकता की चकाचौंध में खो गया सनातन धर्म

फोटो परिचय-सांकेतिक तस्वीर।



पूर्व के समय के रीति रिवाज से जाने कहां खो गए, समय ने बदल दिया ढंग

Morning City

कुसमरा/मैनपुरीभौतिकता की चकाचौंध में सनातन धर्म मे होने वाले शादी विवाह आजकल केवल खानापूर्ति बनकर रह गए है। यहां तक मैरिज होम में विवाह के कार्यक्रम शुरू होने से लड़का पक्ष के लोग ये भी जान पा रहे हैं कि जिस लड़की के साथ शादी हो रही है वह और उसका परिवार कैसा है। पूर्व में विवाह के दिन वर पक्ष अपने पूरे लाव -लश्कर व साज समान के साथ कन्या के गांव के बाहर किसी स्थान पर पहुंच कर अपना टेन्ट, बिस्तर आदि लगाकर ठहर जाता था। वधू पक्ष से लोग परात में जल लेकर बारातियों का पैर धोकर स्वागत करते थे। जलपान आदि के बाद वर  के साथ बारात सजकर गाजे बाजे के साथ वधू के दरवाजे पहुंचती थी। दरवाजे पर कन्या या पिता या अभिभावक देव स्वरूप वर को पालकी या वाहन से उतार कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच द्वार पूजन करते थे। कन्या अपने हाथ में मंगल के प्रतीक अक्षत को वर पर फेंकती थी।

पहले दूसरे दिन तक चलती थी शादी की प्रक्रिया
द्वारचार के बाद वैवाहिक कार्यक्रम शुरू होता था जिसमें पाणिग्रहण, पांव पूजन, कन्यादान एवं अग्नि के समक्ष सात फेरों के बाद सिन्दूरदान होता था। सिन्दूरदान के बाद वर वधू के पैरों को पत्थर से स्पर्श करवा कर अपने अटल संबंधों की दुहाई देता था। प्रातः काल खिचड़ी व खीर खाने की परम्परा थी। दूसरे दिन सायंकाल शिष्टाचार में दोनों अपने तरफ से वर एवं कन्या को आशीर्वाद देते थे तथा मंगल वाचन करते थे। लोग आपस में परिचय प्राप्त करते थे।

भौतिकतावादी परिवेश में परिवर्तित हो गई परम्पराएं
कालान्तर में भौतिकतावादी परिवेश में अब यह सारी परम्पराएं परिवर्तित हो गयी हैं। द्वारचार में कभी वैदिक मंत्रों के पाठ से गूंजने वाला दरवाजा पर अब नवयुवकों के नाचने गाना का स्थान बन गया है। ब्रह्म विवाह में कन्या को देवी स्वरूप मानकर उसे पर्दे में रखकर सारे कार्यक्रम कराये जाते थे उसके स्थान को गंधर्व विवाह के जयमाल प्रक्रिया ने ले लिया। बारात की शोभा रहे मरजाद रखने की परंपरा के साथ शिष्टाचार भी समाप्त हो गया।

अब भोजन करने के बाद वापस हो जाते बराती
अब स्थिति यह है कि आगवानी के पश्चात भोजन करके वापस लौटने तक औपचारिकता बनकर रह गयी है। गांव की लड़की या लड़के की शादी किसी दूसरे गांव में होने पर दोनों गांव के लोग एक दूसरे को रिश्तेदार मानते थे। स्थिति यह है कि परस्पर रक्त संबंधी भी एक दूसरे के रिश्तेदारों को मानने में संकोच करने लगे हैं।


खोज
ताज़ा समाचार
टॉप ट्रेंडिंग
सबसे लोकप्रिय

Leave a Comment