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Mathura News: यमुना एक्सप्रेसवे पर सात बसें व तीन कारें टकराईं, भीषण अग्निकांड में 13 यात्री जिंदा जले, 70 घायल

by morning on | 2025-12-16 15:34:10

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Mathura News: यमुना एक्सप्रेसवे पर सात बसें व तीन कारें टकराईं, भीषण अग्निकांड में 13 यात्री जिंदा जले, 70 घायल


जीरो विजिबिलिटी में मौत का तांडव

 यमुना एक्सप्रेसवे पर सात बसें व तीन कारें टकराईं, भीषण अग्निकांड में 13 यात्री जिंदा जले, 70 घायल, सड़क सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

Morning City

मथुरा आगरा–नोएडा यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा जिले के बलदेव क्षेत्र में मंगलवार तड़के जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। घने कोहरे और शून्य के करीब दृश्यता के बीच तेज रफ्तार वाहनों ने ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही मिनटों में खुशहाल सफर मौत के सफर में बदल गया। एक्सप्रेसवे पर एक के बाद एक वाहनों की टक्कर होती चली गई और देखते ही देखते सात बसें व तीन कारें भीषण हादसे का शिकार हो गईं। टक्कर के तुरंत बाद वाहनों में आग लग गई, जिसने भयावह अग्निकांड का रूप ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, हादसा इतना अचानक और भीषण था कि वाहनों में सवार यात्रियों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। देर रात का समय होने के कारण अधिकांश यात्री बसों में गहरी नींद में थे। तेज टक्कर के बाद उठी आग की लपटों और घने धुएं ने चंद पलों में बसों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी विकराल थी कि कई यात्री जिंदा जल गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार, जलते वाहनों की लपटें और मदद की गुहारें हर किसी के दिल को दहला देने वाली थीं। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब 11 दमकल वाहनों की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। जब आग बुझी तो मंजर और भी भयावह था। जली हुई बसों के भीतर कंकाल पड़े मिले, कई शव इस कदर झुलस चुके थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। कुछ शव बसों की सीटों से चिपके हुए मिले, जिन्हें राहतकर्मियों और पुलिस ने अत्यंत सावधानी के साथ बाहर निकाला।

पुलिस ने जले हुए शवों को 17 बैगों में रखकर पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल केवल तीन मृतकों की पहचान हो सकी है, जबकि शेष शवों की शिनाख्त डीएनए जांच के बाद ही संभव हो पाएगी। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के परिजनों को सूचना दी जाएगी। अस्पतालों के बाहर परिजनों की चीखें और एंबुलेंस के सायरन की आवाज पूरे माहौल को गमगीन कर रही थी। घायल अपनों को तलाशते परिजन बदहवास हालत में इधर-उधर दौड़ते नजर आए। घायलों को एंबुलेंस के जरिए मथुरा और आगरा के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन की ओर से इलाज की समुचित व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन हादसे की भयावहता ने हर किसी को सन्न कर दिया है।

प्रारंभिक जांच में हादसे की मुख्य वजह घना कोहरा और शून्य के करीब दृश्यता मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से चल रहे एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने के बाद पीछे से आ रहे वाहन एक-दूसरे से टकराते चले गए और कुछ ही क्षणों में यह टक्कर भीषण अग्निकांड में तब्दील हो गई। पुलिस और प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और कुछ समय के लिए एक्सप्रेसवे पर यातायात नियंत्रित किया गया। यह हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को एक बार फिर उजागर करता है। जानकारों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2012 से 2023 के बीच केवल कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेसवे पर 338 सड़क दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 75 लोगों की जान गई और 665 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। शीतकाल में कोहरे के कारण हादसे होना अब एक नियमित और चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है।

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह सार्वजनिक सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी भी सड़क या उसके किसी हिस्से पर वाहनों के आवागमन को नियंत्रित या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर सके। इसके बावजूद, घने कोहरे और जीरो विजिबिलिटी जैसी खतरनाक परिस्थितियों में भी एक्सप्रेसवे पर यातायात बेरोकटोक चलता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी स्थिति में समय रहते यातायात को रोका या नियंत्रित किया जाए, तो कई कीमती जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा एक्टिविस्ट के.सी. जैन ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वह शीघ्र ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, ताकि शून्य दृश्यता की स्थिति में वाहनों के आवागमन को लेकर देशभर में एक समान, वैज्ञानिक और बाध्यकारी मानक व्यवस्था लागू की जा सके। उनका कहना है कि देश में तेजी से बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क और वाहनों की संख्या को देखते हुए यह कदम अब समय की मांग बन चुका है।

मथुरा में तड़के हुआ यह भीषण हादसा न केवल 13 परिवारों के लिए जीवन भर का जख्म छोड़ गया, बल्कि यह भी चेतावनी है कि यदि जीरो विजिबिलिटी में तेज रफ्तार और लापरवाह यातायात पर अब भी सख्त निर्णय नहीं लिए गए, तो ऐसे डरावने मंजर बार-बार दोहराए जाते रहेंगे।

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