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Agra News:बुज़ुर्गा पर बेटों का अत्याचार मकान हड़पने के लिए दी जा रही जान से मारने की धमकी

by morning on | 2025-10-28 16:21:01

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Agra News:बुज़ुर्गा पर बेटों का अत्याचार मकान हड़पने के लिए दी जा रही जान से मारने की धमकी



छत्ता थाना क्षेत्र की वृद्धा बोलीं—“मेरे ही बेटे मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे

Morning City

आगरा छत्ता थाना क्षेत्र में 70 वर्षीय वृद्धा के साथ घटित एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसमें दो सगे पुत्रों पर अपनी ही मां को प्रताड़ित करने, धमकाने और जान से मारने का प्रयास करने के गंभीर आरोप लगे हैं। गरीब नगर (भीमराव आंबेडकर मूर्ति के पास) निवासी पीड़िता मीरां देवी ने पुलिस को सौंपे प्रार्थना पत्र में अपने ही बेटों—सुरेश उर्फ छुटकनियां और शिव सिंह उर्फ छोटे—पर लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़िता ने बताया कि दोनों बेटे आए दिन उसे धमकाते हैं कि जिस मकान में वह रहती है, उसे जबरन बेच देंगे। आरोप है कि सुरेश नशे में आए दिन गाली-गलौज करता है और कहता है, “बुढ़िया, तुझे किसी दिन रात में सोते में मार दूंगा।” वृद्धा ने पुलिस को यह भी बताया कि 2 सितंबर 2024 की रात करीब 9 बजे, सुरेश ने जान से मारने की नीयत से उसका गला दबाया, हाथ-पैर मरोड़े और धमकी दी कि अगर उसने मकान बेचकर पैसे नहीं दिए तो उसे जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा।

मीरां देवी का कहना है कि दोनों बेटों ने उसे डराते हुए कहा—“अगर तू हमारी बात नहीं मानेगी तो तुझे उठा कर जमुना में फेंक देंगे, किसी को पता भी नहीं चलेगा।” आरोप है कि बड़ा बेटा शिव सिंह भी लगातार उसे घर से निकालने और संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बनाता है। वृद्धा ने पुलिस से कहा कि सुरेश पहले से ही दफा 60 और 25 (आर्म्स एक्ट) के मामलों में वांछित है और उसका आपराधिक रुझान पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वृद्धा अकेली और असहाय है। वह किसी तरह अपने मकान में रह रही है, जबकि उसके ही बेटे आए दिन झगड़ा कर उसे डराते-धमकाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महिला की स्थिति देखकर समाज में रोष है और लोग चाहते हैं कि पुलिस तत्काल हस्तक्षेप करे।

थाना छत्ता पुलिस को प्रार्थना पत्र मिल गया है, परंतु खबर लिखे जाने तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। स्थानीय प्रशासन से मामले पर जवाब मांगा गया है। समाज के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़िता को सुरक्षा दी जाए और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो बेटों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मां की नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनाओं का सवाल है—जहाँ बेटों के अत्याचार के आगे कानून और इंसानियत की जीत होनी चाहिए।

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