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Agra News:तुलसी विवाह : भक्ति, प्रकृति और मंगल का संगम

by morning on | 2025-11-01 17:59:59

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Agra News:तुलसी विवाह : भक्ति, प्रकृति और मंगल का संगम

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आगरा कार्तिक शुक्ल एकादशी का पावन पर्व इस बार पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यही वह दिन है जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और तुलसी देवी से उनका दिव्य विवाह होता है। तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा के पवित्र मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। शहर के मंदिरों और घर-घर में शुक्रवार को भक्ति की गूंज रही। तुलसी के पौधों को सजे-धजे मंडप में दुल्हन की तरह सजाया गया, वहीं भगवान शालिग्राम को वर के रूप में विराजमान कर विवाह संस्कार संपन्न किया गया। मंगलगीतों और वेद मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर तुलसी-विष्णु विवाह का पर्व उल्लासपूर्वक मनाया।

भक्ति में रमा नगर, तुलसी दल से प्रसन्न होते हैं भगवान विष्णु
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी देवी को भगवान विष्णु की परम प्रिया कहा गया है। “तुलसीदलमत्रेण जलस्य च तुलार्पणम्” — इस श्लोक के अनुसार भगवान को तुलसी दल अर्पित करने मात्र से ही वे प्रसन्न हो जाते हैं। तुलसी न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यावरण की शुद्धि और जीवन में संतुलन की प्रेरणा भी देती है।

तुलसी विवाह से मिलता है परिवार और समाज को एकता का संदेश
पंडितों के अनुसार, तुलसी विवाह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि यह धर्म, पर्यावरण और परिवार के स्थायित्व का प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से भक्ति, प्रकृति और मंगल का समन्वय होता है। तुलसी के सान्निध्य से वातावरण पवित्र होता है, मन को शांति और जीवन में सकारात्मकता मिलती है।

श्रद्धालुओं ने किया दीपदान, मांगी सुख-समृद्धि की कामना
शहर के मंदिरों, विशेषकर श्रीनाथजी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और बालाजी धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और तुलसी माता का श्रृंगार कर दीपदान किया। घरों में भी तुलसी चौरा पर दीये जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा की गई।

सदियों से जीवित है परंपरा का संदेश
तुलसी अमृत की दाता, विष्णु प्रिया सदा सुहागन”—इस लोकगीत की पंक्तियाँ आज भी उसी श्रद्धा से गूंजती हैं, जैसी सदियों पूर्व थीं। तुलसी विवाह का यह पर्व हमें सिखाता है कि जब श्रद्धा और प्रकृति एक सूत्र में बंधते हैं, तभी जीवन में सच्चा मंगल आता है।

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